समावेशी शिक्षा क्या है ? ज़रुरत , फायदे ? Hindi

समावेशी शिक्षा क्या है


दुनियाभर मैं कई स्कूलों मैं बच्चों के बीच भेदभाव किया जाता है उनकी कोई विकलांगता , धर्म, भाषा, लिंग, गरीबी या नस्ल के आधार पे।

लेकिन हर बच्चे का हक़ होता है की उन्हें भी सभी बच्चो की तरह उनके परिवार से प्यार और सपोर्ट मिले।  उन्हें भी अच्छी शिक्सा और अच्छी तरह से बड़े होने का मौका मिले। ये सिद्धांत है समावेशी शिक्षा का।

समावेशी शिक्षा क्या है ?

समावेशी शिक्षा का अर्थ है की समाज के सभी वर्ग के बच्चों को बिना किसी भेद भाव के एक सांथ एक सामान शिक्षा प्रदान की जाये।  चाहे वो सभी बच्चो के सांथ खेलना, खाना, घूमना एवं सभी दूसरी चीज़ों मैं समानता प्रदान की जाये।  

समावेशी शिक्षा विविधता को बढ़ावा देती है और  हर बच्चे को क्लास मैं समान रूप से भाग लेने मैं विश्वास रखती है।  एक सफल समवेशी  शिक्षा की स्थापना मैं जहर बच्चे को सुरक्षा और अपनेपन का भाव महसूस होता है। 
बच्चे और उनके माबाप मिल कर उनके भविष्ये के लिए तैयारी करे और स्कूल मैं भी अध्यापक उन बच्चो को अच्छी तरह से एक सफल जीवन व्यतीत करने के लिए तैयार करैं। 

समावेशी शिक्षा ज़रूरी क्यों है ?

समावेशी शिक्षा की प्रणाली बाचो को बेहतर ज्ञान प्रदान करती है और उनके बीच भेद भाव की भावना को ख़तम कर देती है।  समावेशी शिक्षा के स्कूल बच्चो को उनके परिवार से बहार की दुनिया मैं उनके पहले कदम की और ले जाती है। इससे उन्हें लोगो से घुल मिलने मैं मदद मिलती है।  इससे बच्चे एक दूसरी की दुर्बलता एवं विभ्हीनता को समझते है और आगे चलकर एक बेहतर इंसान  बनते है। 

समावेशी शिक्षा वो  शिक्षा  है जो पारंपरिक रूप से हाशिए के समूहों के खिलाफ भेदभाव को समाप्त करती है और अलग करती है। जब शिक्षा अधिक समावेशी है, तो नागरिक भागीदारी, रोजगार और सामुदायिक जीवन की अवधारणाएं भी बढ़ जाती है। 

क्या उन बच्चो को अलग करना सही नहीं है जिन्हें विशेष ध्यान की ज़रुरत हो ?

अलग और विशेष ध्यान देने से भी विशेष ध्यान की ज़रुरत वाले बच्चो की सफलता की कोई गारंटी नहीं है।  समवेशी शिक्षा प्रदान करने वाले स्कूलों कई गुना ज़्यादा अच्छी सफकता देखि गयी है।  उन श्कूलों मैं जब कोई अतिरिक्त पाठयक्रम की गतिविधियों होती है तो पूरा श्कूल एक जुट होकर एक टीम की तरह काम करता है। 

समावेशी शिक्षा के बुनियादी तत्व क्या हैं ?

  • शिक्षण सहायकों या विशेषज्ञों का उपयोग : इन विशेषज्ञों को के पास सभी बच्चो को एक सामान्य समावेशी शिक्षा देने की क्षमता होती है।  उद्दाहरण के तौर पर एक शिक्षक जो की सभी बच्चो को बराबरी से काम करने का और सीखने का मौका देता है वह सामवेशी है।  बजाए की वो शिक्षक जो की एक ही बच्चे से रोज़ बात करे और उसी से सभी महत्वपूर्ण काम कराये।  
  • सम्मिलित पाठ्यक्रम : एक सम्मिलित पाठ्यक्रम मैं उस तरह के तत्व होते हैं जो की सभी सामाजिक विब्भिंतयों को ध्यान मैं रख कर बांयी गयी हैं।  वे वर्षो से चली आ रही अच्छे और बुरे की भेद भाव की परिभाषा को बच्चो से दूर रखती हैं।  वे विशेष ध्यान की जाऊरत वाले बच्चो की शिक्षा का भी पूरा ध्यान रखकर तैयार की गयी हैं। 
  • अभिभावकों की भागीदारी : ज़्यादतर श्कूलों मैं अभिभावकों की भागीदारी होती है लेकिन वे बस पेरेंट्स-टीचर मीटिंग तक ही सीमित रह जाती है।  एक समावेशी स्कूल मैं कई विभिन्न तरीकों से अभिभावकों की भागीदारी का पूरा ध्यान रखा जाता है। 

समावेशी शिक्षा को आगे कैसे बढ़ाया जा सकता है ?

  • इस बात का पूरा ध्यान रखा जाये की शिक्षकों के पास विशेष ध्यान की ज़रुरत वाले बच्चो को पड़ने की क्षमता एवं  अनुभव हो। 
  • समावेशी शिक्षा प्रदान करने वाले स्कूलों मैं पूरी तरह से आर्थिक क्षमता दी जाये ताकि उनकी किसी प्रकार की समावेशी गतिविधियों मैं कोई रूकावट न आये। 
  • परिजनों को समावेशी शिक्षा के बारे मैं पूरा ज्ञान होना चाहिए ताकि वे अपने बाचे के लिए सही फैसला ले पाएं। 
  • सभी सामाजिक तत्वों को एक सांथ एक जुट होकर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाये। 
  • सरकार की ओर से समावेशी शिक्षा देने वाले स्कूलों को पूरी सहायता दी जाये।  

क्या समावेशी शिक्षा महंगी है ?

समावेशी शिक्षा प्रदान के करना एक सस्ता तरीका नहीं है।  विशेष शिक्षकों को तैयार करना और उनकी सही तरह से अनुभव प्रदान करना सरल नहीं है।  सरकार हो समावेशी शिक्षा मैं निवेश करने के लिए तैयार रैना चाहिए।  ऐसी आधारिक संरचना का निर्माण करना जो की समावेशी हो उसके लिए अच्छा खासा खर्चा करना होगा। 

वित्त पोषण एक अच्छा तरीका हो सकता है जिससे की एक समावेशी स्कोजोल बनाने एवं उनकी रखरखाव मैं मदद होगी। 

Post a Comment

0 Comments